सनातन ग्रन्थ -शास्त्र

हमारे ग्रन्थ -शास्त्र
ईश्वर वाणी – वेद

वेद ही हमारे धर्म ग्रन्थ हैं ।

हमारे ग्रन्थ

ईश्वर वाणी – वेद

वेद ही हमारे धर्म ग्रन्थ हैं ।

वेद का ज्ञान सृष्टि के आदि में परमात्मा ने अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा – इन चार ऋषियों को एक साथ दिया था । वेद मानव मात्र के लिए हैं ।
वेद चार हैं –
ऋग्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद और
अथर्ववेद ।

ऋग्वेद -इसमें तिनके से लेकर ब्रह्म – पर्यन्त सब पदार्थों का ज्ञान दिया हुआ है । इसमें १०,५२२ मन्त्र हैं ।
ब्राह्मण – ऐतरेय
उपवेद – आयुर्वेद

यजुर्वेद -इसमें कर्मकांड है । इसमें अनेक प्रकार के यज्ञों का वर्णन है । इसमें १,९७५ मन्त्र हैं ।
ब्राह्मण – शतपथ
उपवेद – धनुर्वेद

सामवेद -यह उपासना का वेद है । इसमें १,८७५ मन्त्र हैं ।
ब्राह्मण – ताण्ड्य
उपवेद – गान्धर्ववेद

अथर्ववेद -इसमें मुख्यतः विज्ञान – परक मन्त्र हैं । इसमें ५,९७७ मन्त्र हैं ।
ब्राह्मण – गोपथ
उपवेद – अर्थवेद

उपवेद -चारों वेदों के चार उपवेद हैं ।
आयुर्वेद, धनुर्वेद, गान्धर्ववेद और अर्थवेद ।

उपनिषद् – अब तक प्रकाशित होने वाले उपनिषदों की  संख्या २२३ है परंतु प्रामाणिक उपनिषद् ११ ही हैं ।
इनके नाम हैं – ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक और श्वेताश्वतर ।

दर्शन -आस्तिक दर्शन छः हैं –
पूर्वमीमांसा, वैशेषिक, न्याय, योग, साँख्य और वेदान्त ।☆

ब्राह्मण ग्रन्थ -इनमें वेदों की व्याख्या है । चारों वेदों के ब्राह्मण ग्रन्थ निम्न हैं –
ऐतरेय, शतपथ, साम (ताण्ड्य) और गोपथ ।

वेदांग -वेदों के छः अंग हैं जो निम्न हैं –
शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरूक्त, छन्द और ज्योतिष ।

वेदों के उपांग -जिन को छः दर्शन या छः शास्त्र भी कहते हैं ।
१. महर्षि कपिल का साँख्य
२. महर्षि गौतम का न्याय
३. महर्षि पतंजली का योग
४. महर्षि कणाद का वैशेषिक
५. महर्षि व्यास का वेदान्त
६. महर्षि जैमिनि का पूर्वमीमांसा

स्मृतियाँ -स्मृतियों की संख्या ६५ है परन्तु प्रक्षिप्त श्लोकों को छोड़कर *मनुस्मृति* ही सबसे अधिक प्रामाणिक है ।
इनके अतिरिक्त आरण्यक, धर्मसूत्र, गृह्यसूत्र, अर्थशास्त्र, विमानशास्त्र आदि अनेक ग्रन्थ हैं ।

रामायण और महाभारत -ये दो हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थ हैं । रामायण में मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम की गौरव गाथा है और महाभारत में धर्म संस्थापक श्री कृष्ण तथा कौरव पाण्डवों का इतिहास है ।
हमारा बहुत सा साहित्य जला दिया गया । अनेक ग्रन्थ अब उपलब्ध नहीं है।

वेद का ज्ञान सृष्टि के आदि में परमात्मा ने अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा – इन चार ऋषियों को एक साथ दिया था । वेद मानव मात्र के लिए हैं ।
वेद चार हैं –
ऋग्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद और
अथर्ववेद ।

ऋग्वेद -इसमें तिनके से लेकर ब्रह्म – पर्यन्त सब पदार्थों का ज्ञान दिया हुआ है । इसमें १०,५२२ मन्त्र हैं ।
ब्राह्मण – ऐतरेय
उपवेद – आयुर्वेद

यजुर्वेद -इसमें कर्मकांड है । इसमें अनेक प्रकार के यज्ञों का वर्णन है । इसमें १,९७५ मन्त्र हैं ।
ब्राह्मण – शतपथ
उपवेद – धनुर्वेद

सामवेद – यह उपासना का वेद है । इसमें १,८७५ मन्त्र हैं ।
ब्राह्मण – ताण्ड्य
उपवेद – गान्धर्ववेद

अथर्ववेद -इसमें मुख्यतः विज्ञान – परक मन्त्र हैं । इसमें ५,९७७ मन्त्र हैं ।
ब्राह्मण – गोपथ
उपवेद – अर्थवेद

उपवेद -चारों वेदों के चार उपवेद हैं ।
आयुर्वेद, धनुर्वेद, गान्धर्ववेद और अर्थवेद ।

उपनिषद् -अब तक प्रकाशित होने वाले उपनिषदों की  संख्या २२३ है परंतु प्रामाणिक उपनिषद् ११ ही हैं ।
इनके नाम हैं –

ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक और श्वेताश्वतर ।

दर्शन -आस्तिक दर्शन छः हैं –
पूर्वमीमांसा, वैशेषिक, न्याय, योग, साँख्य और वेदान्त ।

ब्राह्मण ग्रन्थ –

 इनमें वेदों की व्याख्या है । चारों वेदों के ब्राह्मण ग्रन्थ निम्न हैं –
ऐतरेय, शतपथ, साम (ताण्ड्य) और गोपथ ।

वेदांग -वेदों के छः अंग हैं जो निम्न हैं –
शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरूक्त, छन्द और ज्योतिष ।

वेदों के उपांग -जिन को छः दर्शन या छः शास्त्र भी कहते हैं ।
१. महर्षि कपिल का साँख्य
२. महर्षि गौतम का न्याय
३. महर्षि पतंजली का योग
४. महर्षि कणाद का वैशेषिक
५. महर्षि व्यास का वेदान्त
६. महर्षि जैमिनि का पूर्वमीमांसा

स्मृतियाँ –

स्मृतियों की संख्या ६५ है परन्तु प्रक्षिप्त श्लोकों को छोड़कर “मनुस्मृति”ही सबसे अधिक प्रामाणिक है ।
इनके अतिरिक्त आरण्यक, धर्मसूत्र, गृह्यसूत्र, अर्थशास्त्र, विमानशास्त्र आदि अनेक ग्रन्थ हैं ।

रामायण और महाभारत –

ये दो हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थ हैं । रामायण में मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम की गौरव गाथा है और महाभारत में धर्म संस्थापक श्री कृष्ण तथा कौरव पाण्डवों का इतिहास है ।
हमारा बहुत सा साहित्य जला दिया गया । अनेक ग्रन्थ अब उपलब्ध नहीं हैं ।