खाने सोने के नियम

सोने का नियम और
घर में ,मंदिर में (शुभ अशुभ)
आने जाने का नियम

सोने के लिए कुछ नियम है
जैसे कि आप सभी जानते हैं कि बाई नाक चन्द्र नाडी होती है तथा दाईं नाक से सूर्य नाड़ी होती है

दोपहर का भोजन जमीन पर चटाई लगाकर और खाने की थाली थोडा उचा रखकर सुखासन मे बैठकर भोजन
करें
दोपहर के भोजन के बाद 20-30 मिनट बाई करवट लेटे ताकि आपकी सूर्य नाड़ी सक्रिय हो जाये और भोजन पचाने में आसानी हो क्योंकि सूर्य नाडी आपकी पाचन क्रिया के लिए ह

श्याम के भोजन के 2 घंटे बाद ही शयन कक्ष में जाये और पहले 5-7 मिनट दाई करवट लेटे फिर 5-7 मिनट बाई करवट लेटे उसके बाद सीधे लेटकर शो जाये

दोनो समय के भोजन के बाद
दो काम अवश्य करें
पहला ये कि दोनो समय के भोजन के तुंरत बाद
पेशाब करने जाये जिससे आपका बडा हुआ रक्त चाप सामान्य हो जायेगा तथा उसके बाद
10-15 मिनट वज्रासन में बैठे

श्याम के भोजन के बाद 1000-1500 कदम अवश्य टहलें

अब बात करते हैं सोने की और दिशाओं की
हमेशा सोते समय सर दछिण दिशा में या पूर्व दिशा में ही रखे

जब भी आप अपने  घर से बाहर निकले
या घर में प्रवेश करे
मंदिर में प्रवेश करे या निकले
अपने व्यवसाय में जाये और वहां से निकले
कही भी शुभ जगह जाये और वहां से आये

तो अपना दाहिने पैर को पहले अंदर  बाहर रखे
कारण ये है कि इससे आपकी चन्द्र नाडी सक्रिय होगी जिसके सक्रिय होते ही आपका मन, चित्त, प्रेम, करूणा, भाव,सब
अच्छा रहता है चन्द्र नाडी के सक्रिय होने से होता है

वैसै ही सूर्य नाडी यदि सक्रिय होती है तो आपको गुस्सा रहेगा मन अशांत रहेगा
जब भी समसान मे, सराब के ठेके पर,जायेे तो बाया पैर आगे रखे
कुछ भी उलटा सीधा करेगे लडाई झगड़ा भी सूर्य नाडी के सक्रिय होने के कारण ही होता है

तो आपका काम भी अच्छा होगा

जब भी आपका मन अशांत हो या या गुस्सा आये तो
सुखासन में बैठकर 5 मिनट दाई नाक को बंद करके बाई नाक से सास ले और छोडे इससे आपकी चन्द्र नाडी शुरू होगी और शांति मिलेगी

अमर बलिदानी श्री राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों से
नेत्रपाल सिंह चौहान