खरी-खरी/जो जिज्ञासु हैं और जिन में संकल्प की और बड़े पुरुषार्थ की लालसा है उनके लिए कतिपय निवेदन :1 रामेश्वर मिश्र पंकज

खरी-खरी/जो जिज्ञासु हैं और जिन में संकल्प की और बड़े पुरुषार्थ की लालसा है उनके लिए कतिपय निवेदन :1 रामेश्वर मिश्र पंकज
पहली बात तो यह है कि राज्य के विषय में ,राज्य के उत्कर्ष के विषय में ,राष्ट्र के विषय में और राष्ट्र के उत्कर्ष के ओविषय में तथा नई संरचनाओं के निर्माण और अभ्युदय के विषय में सोचने वाले संसार में सदा ही थोड़े से लोग होते हैं ।
शेष लोग गतानुगतिक होते हैं ।जो चल रहा है उसी में अर्थ ढूंढ लेते हैं ।
जब अंग्रेज भारत में जमे तो उनके भारत आगमन को ईश्वर की बहुत बड़ी कृपा मानने वाले करोड़ों लोग थे और उनको बाहरी अजनबी आतताई मानने वाले मुट्ठी भर लोग थे ।
धीरे-धीरे धीरे उन्होंने वातावरण बनाया और उन्हें भागने पर विवशकर दिया परंतु उसी बीच ऐसे कमीने लोग भी आए जिन्होंने उनसे सौदेबाजी कर बिचौलिए की तरह सौदेबाजी करते हुए सत्ता स्वयं हड़प ली ।
इन राजनीतिक बारीकियों को जो नहीं समझता वह भविष्य में भी देश के लिए कुछ भी सार्थक नहीं कर पाएगा पहली बात तो यह मन में ठाननी आवश्यक है।

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