खरी खरी -रामेश्वर मिश्र पंकज

मनुष्यों के बीच थर्ड जेंडर यानी नर और नारी से अलग एक तीसरे लिंग को स्वीकृति मिल चुकी है जो बहुत ही अच्छा है। इसी प्रकार भारत के हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हिंदुओं में एक तीसरा जेंडर या एक तीसरा पंथ ,तीसरी पहचान स्पष्ट अंकित होनी चाहिए ।
वे लोग जो निम्नांकित कार्य करते हैं ,उनके लिए न्यूट्रल हिंदू या नपुंसक हिंदू या हिंजड़े हिंदू जैसा कोई उचित नाम तय किया जाना चाहिए और उन्हें सामान्य हिंदू से बिल्कुल अलग श्रेणी का हिंदू मानना चाहिए, उनकी बातों को हिंदुओं की बात कदापि नहीं मानना चाहिए:-
1 जो लोग मंदिर और मस्जिद को एक समान माने औऱ एक सा महत्व दें।
2 जो लोग हिंदू धर्म और इस्लाम दोनों को एक जैसा माने।
3 जो यह कहे कि अगर कोई मुसलमान आतंकवादी है तो उसके मजहब का नाम नहीं लेना चाहिए।
4 जो यह कहे कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की घोषणा गलत है परंतु संपूर्ण भारत को मुसलमान या ईसाई बनाने की घोषणा धार्मिक स्वतंत्रता का अंग है और उसकी अभिव्यक्ति है।
5 जो यह कहे कि भेदभाव से दुखी होकर हिंदुओं का एक समूह मुसलमान बना और साथ ही यह कहें कि उस समूह को पिछड़ों के लिए निर्धारित सुविधा मिलनी मिलती रहनी चाहिए।

प्रयास होना चाहिए कि विधिक स्तर पर हिंदुओं के इस नए पंथ को मान्यता मिल जाए और शासन इसे एक अलग पंथ के रूप में स्वीकार करें परंतु जब तक ऐसा नहीं होता तब तक कम से कम हम लोगों को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में इतना तो प्रारंभ कर देना चाहिए कि इन लोगों की बात को कभी भी हिंदू मत न कहे और यह नहीं कहे कि ऐसे हिंदू हैं या वैसे हिंदू हैं ।
वस्तुतः ये हिंदू है ही नहीं। ये एक अलग प्रजाति है ।उसके लिए उचित नाम आपस के विचार से तय हो सकता है ।मैंने हिजड़े हिंदू, नपुंसक हिंदू ,क्लीव हिंदू ,ऐसे नाम सुझाए ह।ैं आप लोग कुछ अन्य नाम सोच सकते हैं।

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